हार्ट अटैक को नजदीक ला सकती है फेफड़ों की ये बीमारी, किन लक्षणों के देखते ही इलाज शुरू करना जरूरी है?

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हार्ट अटैक को नजदीक ला सकती है फेफड़ों की ये बीमारी, किन लक्षणों के देखते ही
                                            इलाज शुरू करना जरूरी है?

हार्ट अटैक को नजदीक ला सकती है फेफड़ों की ये बीमारी, किन लक्षणों के देखते ही इलाज शुरू करना जरूरी है?

COPD and heart problems: National COPD Awareness Month: सीओपीडी COPD को अक्सर सिर्फ फेफड़ों की बीमारी माना जाता है, जैसे कि सांस लेने में दिक्कत और धीरे-धीरे बढ़ती कमजोरी जैसी समस्याएं होती हैं। लेकिन यह हार्ट अटैक जैसी स्थिति भी पैदा कर सकता है।

हमारे फेफड़ों का स्वास्थ्य हमारे हार्ट से भी जुड़ा होता है और इसलिए अगर आपको हार्ट से जुड़ी समस्याएं हैं तो फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां होने का खतरा रहता है। उसी प्रकार अगर आपको फेफड़ों से जुड़ी बीमारियां हैं, तो भी हार्ट अटैक जैसी कंडीशन होने का खतरा बढ़ जाता है।

सिर्फ फेफड़ों की बीमारी नहीं है सीओपीडी

सीओपीडी सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं होती बल्कि यह कई और बड़ी बीमारियों जैसे दिल की बीमारी और डायबिटीज से गहराई से जुड़ी होती है। अगर मरीज सिर्फ फेफड़ों की दवाइयों पर ध्यान देता है, तो इलाज अधूरा रह जाता है। इसलिए इंटीग्रेटेड केयर यानी समन्वित देखभाल आज के समय की सबसे बड़ी जरूरत है।

दिल पर बढ़ता है दबाव

सीओपीडी के दौरान श्वास नलियों और हवा की थैलियों (Air Sacs) में सूजन आ जाती है और इससे फेफड़ों के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। जब फेफड़े ठीक से ऑक्सीजन नहीं भेज पाते हैं, तो उसके कारण हार्ट से ज्यादा ब्लड पंप करना पड़ता है और उस पर काम का ज्यादा दबाव बढ़ जाता है। लगातार बढ़ते दबाव से दिल की बीमारियां जैसे दिल की धड़कन में गड़बड़ी, दिल की कमजोरी और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।

सीओपीडी और डायबिटीज का संबंध

सीओपीडी में पूरे शरीर में हल्की-सी सूजन बनी रहती है और यही सूजन इंसुलिन को ठीक से काम नहीं करने देती, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और आगे चलकर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, सीओपीडी के लिए दी जाने वाली स्टेरॉयड दवाइयां भी कुछ समय के लिए शुगर बढ़ा सकती हैं।

इंटीग्रेटेड केयर मरीज केंद्रित इलाज

मरीज को कई बार अलग-अलग समस्याओं के कारण अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाना पड़ता है। ऐसे में अलग-अलग सलाह और दवाइयां मरीज को परेशान कर देते हैं। इसीलिए इंटीग्रेटेड केयर की जरूरत है, जहां एक टीम मिलकर मरीज के लिए एक ही प्लान बनाती है।

इंटीग्रेटेड केयर से मरीज को लाभ:

  • एक ही इलाज योजना: फेफड़ों, दिल और डायबिटीज तीनों को ध्यान में रखकर एक प्लान बनाया जाता है।
  • लाइफस्टाइल गाइडेंस: व्यायाम, सही खानपान और धूम्रपान छोड़ना मरीज को सुधारने में मदद करती है।
  • बेहतर मॉनिटरिंग: एक ही जगह से सभी बीमारियों की निगरानी आसान हो जाती है।

निष्कर्ष

सीओपीडी सिर्फ फेफड़ों की एक बीमारी नहीं है, बल्कि यह आपके हार्ट और संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। समय पर निदान और समन्वित देखभाल से इन समस्याओं को नियंत्रित किया जा सकता है। Dr. Abhijeet Singh आपको सही निदान और उपचार प्रदान कर सकते हैं।