NCR की जहरीली हवा से सीओपीडी जैसी बीमारियों का खतरा, हेल्थ एक्सपर्ट ने किया सावधान

Home : : NCR की जहरीली हवा से सीओपीडी जैसी बीमारियों का खतरा, हेल्थ एक्सपर्ट ने किया सावधान

NCR की जहरीली हवा से सीओपीडी जैसी बीमारियों का खतरा, हेल्थ एक्सपर्ट ने किया सावधान

NCR की जहरीली हवा से सीओपीडी जैसी बीमारियों का खतरा, हेल्थ एक्सपर्ट ने किया सावधान

How to Stay Healthy in Polluted City: कोई शक नहीं है कि अब एनसीआर में रहने वाले लोगों के लिए सांस लेना दूभर हो गया है, साफ और ताजी हवा उनके लिए एक सपना बन गई है। सर्दियां आते-आते हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं, क्योंकि प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है और हवा पहले से और ज्यादा जहरीली बन जाती है। प्रदूषण के कारण न जाने कितनी बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है, जिसमें सीओपीडी जैसी जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है।

बढ़ते AQI सांस की बीमारियों का खतरा

ग्रेटर नोएडा के शारदाकेयर हेल्थसिटी में सीनयर कंसल्टेंट औऱ रेस्पिरेटरी मेडिसिन डॉ. अभिजीत सिंह के अनुसार ग्रेटर नोएडा और एनसीआर की कड़कती सर्दियों के बीच इस समय की खराब हवा एक ऐसी हेल्थ इमरजेंसी बन चुकी है, जिसके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी भी नहीं होती है। जैसे-जैसे AQI का स्तर बढ़ता जा रहा है, सरल शब्दों में कहें तो जैसे-जैसे हवा में प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे सांस से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी सीधे तौर पर बढ़ रहा है।

पहले से सांस की बीमारियों के मरीज सावधान रहें

जिन लोगों को पहले से ही सीओपीडी और अस्थमा जैसी बीमारियां हैं, उनके लिए यह गंभीर समस्या बनती जा रही है। लेकिन जिन लोगों को पहले से कोई फेफड़ों से संबंधी या सांस से जुड़ी बीमारी नहीं है, उनमें कई गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ रहा है जिसमें एक्यूट ब्रोंकाइटिस, सांस की नली में इन्फेक्शन और श्वसन मार्गों में एलर्जी आदि जैसी गंभीर समस्याएं देखी जा रही हैं। कई "लंग अटैक" के मामले भी आ रहे हैं, जहां मरीज अचानक बिगड़ जाते हैं, खासकर PM2.5 के जहरीले कणों के कारण।

40 फीसदी बढ़ गए मरीज

जिन महीनों में प्रदूषण बहुत कम होता है, उनकी तुलना में आंकड़ों के हिसाब से OPD में सांस से जुड़ी शिकायतों के मरीजों की संख्या 30–40% तक बढ़ गई है। यानी इस मौसम में मामले इतने ज्यादा बड़े पैमाने पर बढ़ गए हैं। यह सिर्फ आंकड़े नहीं हैं, बल्कि पूरे समुदाय की सेहत पर साफ दिखने वाला बोझ है जिसे जल्द से जल्द कंट्रोल करना बहुत जरूरी है।

बच्चों और बुजुर्गों पर असर

एक स्वस्थ वयस्क की तुलना में वायु प्रदूषण का असर बच्चों और बुजुर्गों पर ज्यादा पड़ रहा होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि बच्चों के फेफड़े धीरे-धीरे विकसित हो रहे हैं और वहं बुजुर्गों के फेफड़े उम्र के अनुसार कमजोर पड़ चुके होते हैं। बुजुर्गों में निमोनिया और हार्ट से जुड़ी दिक्कतों का खतरा बढ़ रहा है। चिंता की बात यह भी है कि अब स्वस्थ युवा भी लगातार खांसी और थकान की शिकायत लेकर आ रहे हैं, यानी कोई भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है।

किन जगहों पर प्रदूषण ज्यादा

देखा जा रहा है कि एनसीआर उन इलाकों में ज्यादा प्रदूषण हैं, जहां पर निर्माण कार्य चल रहा है या फिर धूल-मिट्टी ज्यादा है। ऐसे में यह जरूरी है कि अगर आप ऐसी किसी जगह पर ट्रैवल कर रहे हैं या फिर ऐसी ही जगह पर काम कर रहे हैं, तो खुद की देखभाल करने के जरूरी कदम उठाएं। दिल्ली-एनसीआर के लगभग सभी इलाके प्रदूषित हैं और इसलिए देखभाल हर किसी के लिए करना जरूरी है।

कौन सी सावधानियां बरतें

  • सुबह-शाम बाहर व्यायाम करने से बचें, क्योंकि इन समयों पर प्रदूषण सबसे नीचे जमा होता है।
  • बाहर जाना हो तो N95 मास्क ही पहनें, कपड़े वाले मास्क प्रदूषण को कंट्रोल करने में प्रभावी नहीं है।
  • घर में एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें या ट्रैफिक के पीक समय में खिड़कियां बंद रखें।
  • ज्यादा पानी पिएं ताकि सांस की नली में जमा बलगम समय-समय पर साफ होती रहें, ठंड में गुनगुना पानी ही पिएं।
  • अगर 2 हफ्ते से ज़्यादा खांसी रहे, आराम में भी सांस फूलने लगे, सीने में भारीपन हो या घरघराहट महसूस हो तो तुरंत फेफड़ों के डॉक्टर से मिलें। खुद से दवा न लें।

निष्कर्ष

Dr. Abhijeet Singh आपको सही निदान और उपचार प्रदान कर सकते हैं और आप समय रहते अपने आप को और अपने परिवार को जानलेवा बीमारियों से बचाव पा सकते हैं।